रोहित शर्मा संन्यास की असली वजह का उन्होंने शायद अनजाने में खुलासा कर दिया
तीन महीने पहले रोहित शर्मा संन्यास लेकर टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन अब उन्होंने इसकी असली वजह पर खुलकर बात की है।
उन्होंने इस फॉर्मेट को “मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण” और “थकाऊ” बताया और कहा कि तैयारी ही वह आधार थी, जिसने उन्हें लाल गेंद क्रिकेट की सख़्त चुनौतियों से उबरने में मदद की।
सोमवार को सीईएट (CEAT) के एक पैनल चर्चा में बोलते हुए रोहित ने अपने टेस्ट सफर को याद किया।
मई में रोहित शर्मा संन्यास लेने के फैसले पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे फॉर्मेट में निरंतर प्रदर्शन का रास्ता मैदान से बाहर, घरेलू क्रिकेट और घंटों की तैयारी से होकर गुजरता है।
“टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक टिके रहना पड़ता है। पांच दिन तक खेलना आसान नहीं होता। मानसिक और शारीरिक, दोनों स्तरों पर यह बेहद कठिन होता है,” रोहित ने कहा।
38 वर्षीय पूर्व कप्तान ने भारत की मज़बूत घरेलू क्रिकेट संरचना को इसका श्रेय दिया। उन्होंने बताया कि मुंबई में क्लब मैच भी दो से तीन दिन तक चलते हैं।
“हम इसी माहौल में बड़े होते हैं। यही हमें बचपन से लंबी पारी खेलने और कठिन परिस्थितियों से निपटना सिखाता है,” उन्होंने जोड़ा।
रोहित ने अपने शुरुआती दिनों को भी याद किया और माना कि तैयारी के प्रति उनका दृष्टिकोण समय के साथ बदला। उन्होंने कहा, “जब आप करियर शुरू करते हैं, तो सिर्फ खेल का आनंद लेना ही सब कुछ होता है।
उस समय तैयारी की अहमियत समझ नहीं आती। लेकिन जैसे-जैसे आप सीनियर खिलाड़ियों और कोचों से जुड़ते हैं, आप समझ जाते हैं कि तैयारी ही अनुशासन पैदा करती है, जिसकी टेस्ट क्रिकेट को ज़रूरत होती है।”
2024 में भारत को टी20 विश्व कप जिताने वाले कप्तान जिन्होंने इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से भी संन्यास ले लिया था ने यह भी साफ किया कि हर बड़े मौके के पीछे अनगिनत घंटों की तैयारी होती है।
इस मौके पर उन्होंने यह भी दोहराया कि रोहित शर्मा संन्यास केवल उम्र का नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक दबाव का नतीजा भी था।
उन्होंने कहा, “मैच शुरू होने से पहले ही असली काम होता है। खेल के दौरान तो सब कुछ प्रतिक्रिया (Reaction) पर निर्भर करता है दबाव, परिस्थितियाँ और सही निर्णय लेना। मैच के बीच में तैयारी नहीं की जा सकती। वह पहले से करनी होती है ताकि सही समय पर आप तैयार रहें।”
मानसिक मजबूती पर बोलते हुए रोहित ने कहा कि लंबे फॉर्मेट में लगातार ध्यान केंद्रित रखना बेहद ज़रूरी है। “टॉप लेवल पर प्रदर्शन करने के लिए दिमाग़ का तरोताज़ा और साफ होना ज़रूरी है। एकाग्रता ही कुंजी है और यह स्पष्टता केवल तैयारी से आती है,” उन्होंने कहा।
2019 में टेस्ट में बतौर ओपनर उनकी पारी ने उनके करियर को नई दिशा दी। शुरुआती संघर्ष और छिटपुट मौकों के बावजूद वह आगे चलकर भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट ओपनरों में से एक बने, खासकर घरेलू परिस्थितियों में। यह भी एक कारण था कि रोहित शर्मा संन्यास क्रिकेट जगत के लिए एक बड़ा झटका माना गया।
टेस्ट क्रिकेट से अलविदा कह चुके रोहित उन चुनिंदा आधुनिक खिलाड़ियों में हैं जिन्होंने भारत को विश्व कप दिलाने के साथ-साथ तीनों फॉर्मेट में अपनी छाप छोड़ी।
अंत में उन्होंने कहा, “चाहे खेल हो या ज़िंदगी, तैयारी ही सब कुछ है।” यह वाक्य शायद उनके करियर का सार है एक ऐसा खिलाड़ी जिसने मेहनत और तैयारी के सहारे क्रिकेट के सबसे कठिन मंच पर सफलता हासिल की।
और शायद यही कारण है कि रोहित शर्मा संन्यास को हमेशा उनकी मेहनत और समर्पण के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।