जसप्रीत बुमराह या मिचेल स्टार्क नहीं चेतेश्वर पुजारा संन्यास के बाद बताए सबसे कठिन गेंदबाज
भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा संन्यास की घोषणा कर चुके हैं। रविवार, 25 अगस्त को उन्होंने सभी प्रारूपों से क्रिकेट को अलविदा कह दिया।
37 वर्षीय पुजारा ने भारत के लिए 103 टेस्ट और 5 वनडे मैच खेले और एक दशक से अधिक समय तक टीम के टेस्ट बल्लेबाज़ी क्रम की रीढ़ बने रहे।
अपने करियर के दौरान पुजारा ने विश्व क्रिकेट के कई दिग्गज गेंदबाजों का सामना किया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने डेल स्टेन, मोर्ने मोर्कल, जेम्स एंडरसन और पैट कमिंस को अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण गेंदबाज बताया।
“अपने करियर में डेल स्टेन, मोर्ने मोर्कल, जेम्स एंडरसन और पैट कमिंस मेरे सामने सबसे मुश्किल गेंदबाज रहे हैं,” पुजारा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा।
चेतेश्वर पुजारा संन्यास पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह उनका निजी निर्णय था। उन्होंने बताया कि पहले वे रणजी ट्रॉफी खेलने का विचार कर रहे थे, लेकिन फिर सोचा कि बेहतर होगा अगर यह मौका किसी युवा खिलाड़ी को मिले।
“यह मेरा व्यक्तिगत फैसला था। मुझे लगा कि यह सही समय है और अब युवा खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में अवसर मिलना चाहिए। पहले मैंने सोचा था कि रणजी खेलूँगा, लेकिन फिर लगा कि अगर कोई युवा खिलाड़ी यह मौका पाएगा तो उसका करियर जल्दी संवर सकता है। इसलिए मैंने यह निर्णय लिया,” पुजारा ने स्पोर्ट्स तक से बातचीत में कहा।
अपने शानदार करियर में पुजारा ने 7,195 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 43.60 रहा। उन्होंने 19 शतक और 35 अर्धशतक जमाए और कई अहम मौकों पर भारत को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
चेतेश्वर पुजारा संन्यास भले ही भारतीय फैंस के लिए भावुक करने वाला पल है, लेकिन उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
टेस्ट क्रिकेट में पुजारा का किरदार इतना अहम रहा कि उन्हें भारत की “दीवार” कहा गया। चेतेश्वर पुजारा संन्यास के बाद टीम इंडिया को उनकी जगह भरना आसान नहीं होगा।
भले ही सीमित ओवरों के क्रिकेट में वे सफल नहीं हो पाए, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट में उनका नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।
भारतीय क्रिकेट में चेतेश्वर पुजारा संन्यास एक ऐसे दौर का अंत है, जिसमें धैर्य, तकनीक और जुझारूपन का शानदार उदाहरण देखने को मिला।